लाइफ स्टाइल

स्कूल के वो दिन जो हम में से ज्यादातर लोग नहीं भूल पाते

स्कूल के दिनों की बात ही अलग है। ये बात आप हमेशा आप कई लोगो के मुँह से सुनते मिल जाएंगे। ज्यादातर लोग अपने स्कूल के दिन नहीं भूल पाते। तो  ऐसी कोनसी बात होती है स्कूल के दिनों की जो ज्यादातर लोगो के चेहरे पर मुस्कान ला देती है । स्कूल के दिन हमारे , हमारे दोस्तों ,हमारे घर और हमारे स्कूल के स्कूल के हिसाब से अलग अलग होते है लेकिन कुछ चीज़े है ऐसी है जो ज्यादातर लोग करते ही है और अगर हम अपने आज के जीने के तरीके को थोड़ी देर के लिए भूल जाए तो हमारे  स्कूल के वो दिन वापस आ सकते है। कैसे ?


 

कम जानकारी मतलब कम अनुभव मतलब नो टेंशन

ये हमारे स्कूल टाइम को मस्त तरीके से जीने का सबसे बड़ा कारण है। क्योकि जब हम दुनिया को ज्यादा जानने लगते है तो हमें दुनिया के काम करने के तरीके से दिकत होने लगती है और हम चाहते है कि इसे बदला जाए। बस यही वो चीज़ है जो हमारे स्कूल के दिनों में ज्यादातर हमें इन चीज़ो को कुछ खास परवाह नहीं होती । हमें नहीं मतलब कि SC , OBC और GENERAL से हमें कितना फर्क पड़ेगा। इराक में क्या हो रहा है और ईरान में क्या होगा। हम सिर्फ कुछ खास और सबसे जरुरी बातो के बारे में सोचते है जैसे आज टिफ़िन में क्या है , हमारे फेवरिट कार्टून के बारे में बात करना , पेन , पेंसिल , होमवर्क और सरप्राइज़ टेस्ट बस ये ही कुछ चीज़े होती है हमें जिनसे मतलब होता है। हम बेमतलब की बातो में कम पड़ते है।


 

NO घुमा फिरा के

स्कूल टाइम में हमें जो कहना होता है हम मुँह उठा के कह देते है अपने टीचर से और अपने क्लासमेट से हमें इस बात की कम फ़िक्र होती है कि कोई इस बारे में क्या सोचेगा और आज हम सेकड़ो बाते अपने अंदर दबा के इसलिए रखते है कि कोई क्या सोचेगा। अब इसकी अच्छी बात ये होती है कि जब हम स्कूल टाइम में होते है तो बड़ो द्वारा हमारी बात को ज्यादा सीरियसली नहीं लिया जाता और बच्चा समझकर अपना ध्यान हटा लेते है। हम काम बनाबटी होते है।


 

अनलिमिटेड बेवकूफियां – अनलिमिटेड फन

स्कूल टाइम सबसे ज्यादा बेवकूफियां करते हुए निकलता है और कॉलेज टाइम तक अपने चरम पर होता है। उसके बाद हम अपने में सिमटना शुरू हो जाते है। जबकि ये इंसानी गुण होता है कि उल जुलूल चीजे करना जैसे हंसना , चिल्लाना , रोना , मुँह बनाना, ज्यादा अच्छा लगता है और कई लोग इनमे से कई सारे काम , कई सारे कारणों की वजह से छोड़ देते है। आपके अंदर डर कम होता है।


 

लिमिटेड कॉम्पटीशन

कम्पटीशन की तय मात्रा हमारे स्कूल टाइम को सबसे बेहतरीन जगह बनती है। कॉम्पिटिशन होता तो है लेकिन एक लिमिटेड मात्रा में। जो कि हमारी क्लास से शुरू होकर दोस्तों पर खत्म होता है और बढ़ती क्लास हमें तरक्की का एहसास कराती है। जबकि आज हम किसी भी पोस्ट पर पहुंच जाए हमारे लिए कम्पटीशन बढ़ता जाता है चाहे ये घर से हो, पड़ोस से हो ऑफिस में हो या सोशल मीडिया पर हो।


 

नए नए दोस्त मतलब ज्यादा मस्ती

कॉलेज और प्रोफेशनल लाइफ के मुकाबले ,स्कूल टाइम ही हमारे लिए ऐसा टाइम होता है जब हमारे सबसे ज्यादा दोस्त बनते है और सीधी सी बात है कि स्कूल टाइम उनका भी है तो वो भी कई मामलो में वैसे ही होते है जैसे आप है बस दोनों के मिलने की देर होती है फिर क्या आप और आपका दोस्त मिलके ऐसे कारनामे करना शुरू कर देते है कि जिनके बारे में आज भी बात करना पसंद करते जिन्हे सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इनमे से हर दोस्त की अपनी ही विशेषता होती थी जो हमें मिला जुला लेकिन वेरायटी से भरा एंटरटेनमेंट देती थी।


 

रोज नईं चीज़े सीखना

School ke woh din - रोज नईं चीज़े सीखना - School Memories Hindi Stories

घर , स्कूल , टूशन, और स्कूल ये वो जगह होती है जहा हमारा सबसे ज्यादा समय बीतता है और इन जगह पर सीखे हुए का महत्त्व भी सबसे ज्यादा होती है क्योकि हमें इस टाइम पर हमें जितने भी पता होता है वो हमारे लिए काफी होता है। चाहे वो टीचरो से सिखने को मिले , क्लास में सिखने को मिले , दोस्तों से सिखने को मिले , या किताबो से सिखने को मिले हम इस सिखने को किसी और टाइम से ज्यादा एन्जॉय करते है। हम हर प्रकार की एक्टिविटी को आजमाना पसंद करते है।


सबसे ज्यादा खोज स्कूल टाइम में

स्कूल टाइम कई प्रकार की खोज करने के लिए भी जाना जाता है जैसे टीचरो और दोस्तों के नए नए नाम रखना, दोस्तों को टिफिन में क्या है उसके पता चले बिना पता लगाना , पढ़ाई करने और याद करने के नए नए तरीके बनाना , चीटिंग करने के नए नए तरीके ढूंढ़ना। इस टाइम पर हमारे करने तक हमारे लिए कुछ कठिन नहीं होता चाहे दुनिया के लिए वो बिलकुल न मुमकिन हो।


बिंदास शेयरिंग

School ke woh din - बिंदास शेयरिंग - School Memories Hindi Stories

अपनी होमवर्क की नोट बुक देना हो या बुक और फिर टिफिन की शेयरिंग,अपने खेलने की सामान,अपने जरूरत की चीज़े दोस्त की जरुरत पूरी करने के लिए देना। ये शेयरिंग आज के मुकाबले ज्यादा मजेदार और अच्छी होती थी क्योकि ज़्यदातर सामान हम टीचर और घर वालो से छुपकर देते थे और क्योकि दुपा छुपकर देते थे इसलिए वापस मिलने के सम्भावना भी काफी होती थी।


हम कम सूजे हुए घूमते है

स्कूल टाइम पर आपका स्कूल और घर में कई बार पूजन होना अनिवार्य होता है और दोस्तों से गुथम गुथा होने से आपको कोई डर नहीं था । ये सब चीज़े कई बार होती है लेकिन हम इन्हे जीवन भर का रोग नहीं मानते और 5 मिनट बाद ,5 घंटे बाद या अगले दिन फिर से नार्मल हो जाते है क्योकि कई मामलो में हम कुछ नहीं कर सकते और झुकना पड़ता है ये आपके साथ के लोगो को खुश करता है और आप अगले  दिन से फिर अपने वही अवतार में वापस लोट आते है इसलिए हमारे पास स्कूल टाइम के अच्छे दिनों की लिस्ट ज्यादा बड़ी होती है।


हम वो करते है जो हमें ज्यादा पसंद है

School Memories Hindi Stories - हम वो करते है जो हमें ज्यादा पसंद है - School ke woh din

लोगो कि इच्छाए पूरी करते और आर्डर मानते मानते हम अधूरे हो जाते है लेकिन स्कूल टाइम में ऐसा नहीं था टीचर , मम्मी – पापा के हमेशा कोई कोई काम के लिए दबाब बनाने के वाबजूद भी हम ऐसे मौके और टाइम खोज लेते है। जब हम अपने मन का काम कर जाते थे।  उसके आलावा कुछ ऐसे काम भी कर जाते है जिसे अब करने के बारे सोचना भी अजीब लगता है।प्रेयर में एक दूसरे को चिड़ाना और धक्का मरना , क्लास में लेट पहुंचना और फिर जाने अंजनाने बहाने बनाना, दोस्तों को चौक और कागज फैक कर मरना , टीचर के घूमते ही उल्टी सीधी आवाज निकलना,लास्ट बेंच पर बैठकर चलती क्लास में लांच खाना और कभी कभी सो जाना। बोर्ड पर उल जुलूल चीज़े बनाना और लिखना।  हमें इस बात की परवाह ज्यादा होती है कि हमें क्या अच्छा लगता है वजाय इसके कि दुसरो के क्या अच्छा लगेगा।


 

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Neelesh

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Movie and Tech lover. Inspired and Hardcore Learner Content Producer, Love to write and create. Unlocking thoughts and Ideas, share and experience the things happened around. Speak less that way write.

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