लाइफ स्टाइल

देश की एक मात्र जगह यहाँ के लोगो के लिए नहीं है दिवाली कोई बड़ा त्यौहार

Reasons why Diwali is not celebrated on large scale in Kerala

दिवाली, कुछ जगह पर दीपावली और बाकि दुनिया के लिए “फेस्टिवल ऑफ लाइट्स” हिंदू धर्म के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है और हिन्दू धर्म ही क्यों पुरे भारत के लिए और हर एक भारतीय के लिए जो देश में रहता हो या देश से बहार। एक ऐसा त्यौहार जो पूरे भारत में बहुत धूम धाम और खुशी के साथ मनाया जाता है।

दिवाली 2018source

लेकिन एक ऐसी जगह है भी है जहां लोग दिवाली जैसे बड़े त्यौहार के लिए बिलकुल भी उत्साहित नहीं रहते हैं। केरल भारत का एकमात्र राज्य है जहां दिवाली एक प्रमुख त्यौहार नहीं है। केरल के मूल लोग दिवाली नहीं मनाते हैं। केरल के लोग अपनी संस्कृति और जातीयता से बंधे हैं और वे अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए किसी भी प्रकार के नए क्रिया कलाप जोड़ने से पहले कई बार सोचते हैं।

दिवाली केरल 2018source 

केरल में ओणम , विशु और शिव राथरी उनके प्रमुख त्यौहार हैं। ओणम भारत के सबसे पुराने त्यौहार में से एक है यही समय है जब केरल की सांस्कृतिक विरासत पूरी तरह से खिल उठती है। केरल के ज्यादातर लोग उत्तर भारत में मनाए जाने वाले दिवाली, होली, रक्षाबंधन, दशहरा जैसे त्यौहार नहीं मनाते हैं।

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ब्रिटिश के भारत में किये गए कोलोनाइज़ेशन तक भारत के बाकी हिस्सों से भौगोलिक रूप से अलग-थलग रहा था। इसलिए बाकी भारत के साथ केरल से कोई बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं हुए हैं। वास्तव में केरल का सांस्कृतिक आदान-प्रदान मध्य एशिया से ज्यादा है।

लेकिन अब चीजें बदल रही हैं

टेलीविज़न के आने के बाद से और भारत के बाकी हिस्सों की तरह दिवाली मनाने की परंपरा केरल में लोकप्रियता प्राप्त कर रही है।आने वाले वर्षों के लिए केरल में दिवाली का त्यौहार उसी धूम धाम से मानाने की उम्मीद कर सकते हैं!

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