फैक्ट्स

बीते समय की चार घटनाए जो बताती है कि सामने वाले को गलत साबित करना है तो बोलकर नहीं करके दिखाना ज्यादा बेहतर है

deeds not words speak louder

आज किसी के कहे पर ऑफेंड हो जाना आम हो गया है कोई हमारे या हमारे देश के बारे में कुछ भी कह दे या कर दे उसके बाद हम सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकलना शुरू कर देते है और किसी भी व्यकित की बात का जबाब देते हुए उसे तबज्जो देने लगते है। आज हम भले ही किसी मामले(कुछ मामलो में तो दुनिया से भी आगे है)में कम नहीं है फिर भी दुनिया के कई देश के लोग हमें कम आंकते की भूल करते है और गलत बयानबाज़ी करते है लेकिन

बीते समय की कुछ ऐसी घटनाएँ भी है जिस में हमारे यहाँ के लोगो ने शब्द का सहारा नहीं लिया बल्कि वो करके दिखाया जिसकी सामने वाला उम्मीद भी न कर पाए और उन्हें ये महसूस कराया कि उनसे कितनी बड़ी गलती हो गई।

कहानिया तो काफी है लेकिन ये चार कहानियाँ में जबाब देने के अंदाज़ अनोखा था।

जब भारतीय राजा ने रोल्स रॉयल्स से लिया अपनी इंसल्ट का बदला

source 

1920 एक बार जब राजा जय सिंह लन्दन की यात्रा पर गए हुए थे और एक साधारण भारतीय पोशाक में लन्दन के स्ट्रीट में घूम रहे थे। इस दौरान उनकी नजर रोल्स रॉयल के शोरूम पर पड़ी और वो गाड़ी कि स्पेसिफिकेशन और बाकि जानकारी लेने के लिए शोरूम के अंदर एंटर हुए।

रोल्स रॉयल के सेल्स पर्सन ने उन्हें साधारण ड्रेस में देखकर किसी अप्रवासी भारतीय समझा और कार के बारे में बताने के वजाय बहार जाने को बोल दिया। राजा जय सिंह बिना कुछ बोले वहाँ से निकल गए अपने होटल पहुंचे ,अपनी राजा वाली अटायर पहना और रोल्स रॉयल के शोरूम पहुंच गए और 6 रोल्स रॉयल्स पूरा केस देकर खरीद ली।

कार को इंडिया लाते है जय सिंह ने नगर निगम को सभी रोल्स रॉयल गाड़ियों से कचरा उठाने के लिए कहा और रोड साफ करने के काम पर लगा दिया। ये बात आग कि तरह फ़ैल गई कि जो गाड़ी शान का प्रतिक मानी जाती है उससे इंडिया में कचरा उठाया जा रहा है। लोग रोल्स रॉयल्स रखने में शर्मिंदगी महसूस करने लगे।

source 

रोल्स रॉयल के रेवेन्यू और मार्किट भी तेजी से गिरने लगा और चारो तरफ रोल्स रॉयल की किरकिरी हो गई। कंपनी को अपनी गलती का एहसास हुआ और टेलीग्राफ के जरिए उन्होंने राजा से माफ़ी मांगी।

 

जब सचिन ने ऑस्ट्रेलियाई बॉलर की बात का जबाब अपने बल्ले से दिया

1992 में इंडियन टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी। मैच शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलियाई बॉलर क्रेग मैकडर्मॉट जो उस समय ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन बोलारो में से एक थे ,ने मीडिया में ये बयान दिया की सचिन मेरे लिए कोई चुनौती नहीं है और उसे में पर्थ के क्रिकेट ग्राउंड में ही आकर देखूगा।

सचिन फॉर्म में तो थे लेकिन वो उसे स्टेज पर नहीं थे कि वे क्रेग का चैलेंज स्वीकार कर सके। पर्थ में पिच भी गेंदबाज के ही पक्ष में थी और वो मौका आ ही गया जब सचिन क्रेग मैकडर्मॉट के सामने थे। उन्होंने सचिन को पहली ही बोल एक जोरदार बाउंसर डाली जिसे सचिन ने सीधे बाउंड्री के पर पंहुचा कर सिक्स जड़ दिया। पुरे मैच में सचिन की विस्फोटक पारी जारी रही और 114 रनो की पारी खेली और सबसे ज्यादा रन क्रेग के खिलाफ ही बनाए।

इसके बाद किसी ने सचिन बाद में देखने की चुनौती शायद ही दी हो बाद में मैकडर्मॉट ने कहा, “सचिन की सबसे बड़ी ताकत है उनकी स्थिरता और स्वभाव । वह सभी परीस्थितियों में बल्लेबाजी कर सकते है और कोई भी क्रिकेटर उनकी बराबरी नहीं कर सकता”

जब रतन टाटा ने बिल फोर्ड से लिया अपनी इंसल्ट का बदला

 

टाटा ग्रुप इंडिया के लीडिंग बिज़नेस हाउसेस में से एक है जो नहीं सिर्फ अपने बिज़नेस स्केल बल्कि बिज़नेस में वैल्यू के लिए भी जाना जाता है। रतन टाटा भी , टाटा ग्रुप की इस ग्लोरी का हिस्सा है। हमेशा प्रयोग करने वाले रतन टाटा ने 1998 में पैसंजर कार के बिज़नेस में उतरने के लिए टाटा इंडिका लॉन्च की।

दुर्भाग्यवश टाटा इंडिका पहले ही साल में एक बड़ा फेलियर साबित हुई। कई लोगो ने रतन टाटा को सलाह दी की उन्हें अपने पैसंजर कार के बिज़नेस को बेच देना चाहिए। रतन टाटा ने भी जाहि करना ठीक समझा। लन्दन स्थिति फोर्ड कंपनी ने टाटा की पैसंजर कार कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई।

source 

रतन टाटा आने कुछ करीबी सहयोगियो की टीम के साथ डेट्रॉइट स्थित फोर्ड के हेडक्वार्टर्स पहुंचे। 3 घंटे की मीटिंग के दौरान फोर्ड कंपनी के एम्प्लोयी का टाटा ग्रुप के रेप्रेज़ेंटेटिव के प्रति व्यव्हार अपमान जनक था। जहाँ तक कि फोर्ड कंपनी के मालिक बिल फोर्ड ने रतन टाटा से कहा “अगर आपको पैसंजर कार के बिज़नेस में आये ही क्योकि जब आपको इस बिज़नेस के बारे में जानकारी ही नहीं है। हम ये कंपनी खरीद कर आप एहसान कर रहे है”

रतन टाटा को ये बात बिलकुल पसंद नहीं आई , उन्हें ये काफी इंसल्टिंग महसूस हुआ और रात भर सोचने के बाद सुबह होते ही वो बिना डील किये भारत आ गए। टाटा की पैसेंजर कार कंपनी शुरुआती नुकशान के कुछ समय बाद ही मजबूत स्थिति में आ गई। 2008 आते आते फोर्ड कम्पनी घाटे में जाने लगी और लगभग कंगाली की कगार पर आ गई। इसी मौके का फायदा उठाते हुए रतन टाटा ने फोर्ड की दो लक्ज़री कार ब्रांड जैगुआर और लैंड-रोवर को खरीदना का ऑफर फोर्ड कंपनी के सामने रखा।

इस बार फिर मीटिंग हुई लेकिन बॉम्बे हाउस में-टाटा ग्रुप का हेडक्वार्टर जहां बिल फोर्ड भी कंपनी रिप्रेजेन्टेटिव के साथ मीटिंग में पहुंचे। टाटा ग्रुप में 2.3 बिलियन डॉलर की डील के साथ जैगुआर और लैंड-रोवर को खरीद लिया।

इस बार बिल फोर्ड को अपने शब्द याद आ गए और उन्होंने रतन टाटा से कहा कि ये डील करके अपने हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है।

आज जैगुआर और लैंड-रोवर टाटा ग्रुप का हिस्सा है और प्रॉफिट में भी है।

 

जब कुछ महिलाओं ने विवेकानन्द का ट्रैन में उड़ाया मजाक

source

स्वामी विवेकानंद जब एक ट्रेन में यात्रा कर रहे थे और एक कलाई घड़ी पहने हुए थे जिसने ट्रेन में मौजूद कुछ विदेशी महिलाओं का ध्यान खींचा, वे उनकी भेषभूषा का मजाक उड़ा रही थी , ये जानने के बाद भी विवेकानंद कुछ नहीं बोले लेकिन ट्रैन में मौजूद महिलाओं ने इससे भी आगे बढ़कर स्वामी विवेकानंद को तंग करने का योजना बनाई।

महिलाओं ने उनसे उनके हाथ पर बंधी घड़ी देने के लिए कहा और कहा की अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो वे पुलिस को कम्प्लेन करेंगी के ये शख्स उन्हें परेशान कर रहा है, वह चुप रहे और गूंगा होने के नाटक किया; लड़कियों को पेपर के टुकड़े पर जो कहना है, उसे लिखने के लिए इशारो में समझाया, लड़कियों ने यही बात कागज पर लिखी और विवेकानद को दे दी।

सोचिए विवेकानंद ने आगे क्या किया ? वे जोर से बोले ; उन्होंने पुलिस को बुलाया और कहा, ‘मुझे एक कम्प्लेन करनी है। स्वामी जी ने लेटर पुलिस वाले के हाथ में सौप दिया। लड़कियों की गलती पकड़ी गई थी इसलिए उन्होंने विवेकानंद से माफ़ी मांगी।

विज्ञापन