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सिंथेटिक रबर से लेकर वियाग्रा तक ये 10 बड़ी खोज गलत एक्सपेरिमेंट का नतीजा

most famous accidental inventions

दुनिया के कई अद्भुत आविष्कारों ने दशकों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किये गए , लेकिन दुनिया के कई बड़े और महत्वपूर्ण अविष्कारों की खोज एक्सीडेंटली हुई है। ये परीक्षण कुछ और बनाने के लिए किये गए थे लेकिन बन कुछ और गए और  बनाने के बाद ये हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए।

माचिस

जॉन वाकर उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन-ऑन-टीज़ में एक फुल टाइम फार्मासिस्ट थे, लेकिन अपने खाली समय में वे अक्सर घर पर प्रयोग किया करते थे। उन्होंने बंदूकें के लिए एक दहनशील पेस्ट बनाने की उम्मीद से  स्टार्च, पोटेशियम क्लोराइट, एंटीमोनी सल्फाइड और अन्य अवयवों के मिश्रण को तैयार किया जिसे मिलाने के लिए उन्होंने एक लकड़ी की छड़ी का इस्तेमाल किया था।

इस मिश्रण का थोड़ा सा हिस्सा छड़ी के एक हिस्से में सूख गया, जिसे निकलने के लिए जॉन ने लकड़ी को फर्श पर रखकर पत्थर से प्रहार किया तो फर्श से रगड़कर लकड़ी ने आग पकड़ ली और इसी दिन दुनिया की पहली माचिस का अविष्कार हुआ। जॉन ने इसे बेचकर काफी पैसे कमाए लेकिन इसका पेटेंट नहीं करा पाए जिस वजह से इसके बाद इस पर कई लोगो ने अपना अविष्कार बताया।

 

पटैटो चिप्स  

1953 में जॉर्ज क्रॉम न्यूयॉर्क में सारतोगा स्प्रिंग्स में मून लेक लॉज रिज़ॉर्ट में  शेफ के तौर पर काम कर रहे थे। फ्रेंच फ्राइज इन रेस्तरां में काफी लोकप्रिय थे। एक दिन एक कस्टमर ने शिकायत की कि फ्राइज़ कुरकुरे नहीं है।

शिकायत पर जॉर्ज क्रम ने इस बार फ्रेंच फ्राइज थोड़े पतले साइज में बनाए , फिर भी ग्राहक असंतुष्ट था। क्रम ने गुस्से में आकर उस कस्टमर को भागाने की इक्छा से बिलकुल पतले फ्राइस बना कर दे दिए  आश्चर्यजनक रूप उस कस्टमर को ये पसंद आये और इस तरह आलू चिप्स का आविष्कार हुआ !

क्रम के बनाए चिप्स को मूल रूप से सारतोगा चिप्स और पटैटो क्रंचेस कहा जाता था। उन्हें जल्द ही न्यू इंग्लैंड में पैक करके बेचा जाने लगा  – क्रम ने बाद में अपना खुद का रेस्तरां खोला।

 

सिंथेटिक रबर 

1800 के दशक में लोग नेचुरल रबर का इस्तेमाल कई प्रकार से करते थे लेकिन दिकत ये थी कि ठण्ड में ये अत्यधिक कड़क और गर्मी में जरुरत से ज्यादा लचीली हो जाती थी। जिस वजह से लोग इसका इस्तेमाल करना कम करने लगे थे और निर्माताओं ने भी इसे बनाने से पीछे हटने लगे थे।

ऐसे में चार्ल्स गुडिययर ने रबड़ को अधिक टिकाऊ बनाने के विभिन्न तरीकों का प्रयोग करना शुरू किया, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। एक दिन उनसे गलती से गर्म स्टोव पर रबर का एक दुकड़ा गिरा गया जिस वजह से उस दिन vulcanization की प्रक्रिया की खोज हुई।

वल्कनाइजेशन रबड़ को अधिक टिकाऊ और मौसमरोधी बनाता देता है। गुडियर अपनी खोज के लाभों का फायदा उठाने के लिए जीवित नहीं रहे और  200,000 डॉलर के कर्ज के साथ उनकी मृत्यु हो गई। सौभाग्य से, उनकी विरासत गुडियर टायर और रबड़ कंपनी के साथ जिन्दा है।

 

कोका कोला 

हिस्ट्री एक्स्ट्रा के अनुसार अमेरिकी रसायनज्ञ डॉ जॉन पेम्बर्टन ने शुरुआत में अपने फ्रेंच वाइन कोला को सिरदर्द के इलाज के रूप में बनाया था। अपने मूल निवास अटलांटा में 1880 के दशक में टेम्पेरेन्स आंदोलन के दौरान उत्पन्न तनाव ने उन्हें शराब और कोका सिरप के नुस्खा को अनिच्छुक रूप से मिलकर पीने के लिए मजबूर कर दिया, हालांकि बाद में इसमें प्रतिबंधित शराब को हटा दिया गया। सिरप अब पहले से पतला हो गया लेकिन जब पहली बार सोडा पानी के साथ इसे टेस्ट किया गया तो पेम्बर्टन को एहसास हो गया था कि उन्होंने कुछ बेहतरीन बनाया है।

एक्स-रे 

1895 में जर्मन भौतिक विज्ञानी विल्हेम रोएंजेन गैसों पर इलेक्ट्रिक करंट के प्रभाव का अध्ययन कर रहे थे, जब एक्स-रे जैसी किसी चीज़ के बारे में किसी को कोई जानकरी नहीं थी। चूंकि वे इलेक्ट्रॉन डिस्चार्ज ट्यूब के साथ प्रयोग कर रहे थे , उन्होंने देखा कि फ्लोरोसेंट स्क्रीन से एक रौशनी आ रही है। आश्चर्यजनक रूप से, उन्होंने पाया कि कोई भी ऑब्जेक्ट उस रौशनी को रोक नहीं पा रहा है और ये रौशनी एक फिल्म शीट के आर पर भी जा सकती है , वैज्ञानिक के मुताबिक उस शीट पर डॉक्टर ने अपने एक हाथ की छवि निकली थीजिसे दुनिया का पहला एक्स-रे माना जाता है।

पेनिसिलिन

 

वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा 1928 में पेनिसिलिन की खोज इतिहास में की गई कई बड़ी खोजो में से एक है। एक बार जब वह छुट्टी के बाद घर लौटे, तो उन्होंने देखा कि मोल्ड ने किसी भी तरह से स्टैफिलोकोकस जीवाणु के पेट्री डिश को दूषित कर दिया था। हिस्ट्री एक्स्ट्रा की रिपोर्ट के अनुसार , मोल्ड कल्चर ने चमत्कारी रूप से बैक्टीरिया के बढ़ने को रोकने के लिए , अपने चारों ओर एक जीवाणु मुक्त सर्कल बना लिया था।

फ्लेमिंग ने पदार्थ की क्षमता को महसूस कर लिया था , लेकिन एक दशक बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक हावर्ड फ्लोरि और अर्न्स्ट चेन ने इसका एक सुरक्षित और सही उपयोग आश्चर्यजनक दवा में बदलने में किया। थॉटको की एक रिपोर्ट के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस दवा ने तेजी से अनगिनत जीवन को बचाने का काम शुरू कर दिया था जिसने घायल सैनिकों और नागरिकों को संभावित रूप से घातक संक्रमण होने से बचने में मदद की।

वियाग्रा 

फार्मास्यूटिकल कंपनी फाइजर ने मूल रूप से रक्तचाप को कम करने, रक्त वाहिकाओं का विस्तार करने और एंजिना का इलाज करने के लिए कार्डियोवैस्कुलर ड्रग के रूप में पहली बार वियाग्रा के उपयोग एक परीक्षण में  किया था। हालांकि परिणाम निराशाजनक साबित हुए, कुछ पुरुषो में इस परीक्षण के साइड इफ़ेक्ट दिखाना शुरू हो गए और कई अजीब स्थिति में पाए गए। उनमे से किसी ने भी दवा से होने वाले ऐसा कोई अनुभव नहीं किया था।

फाइजर ने इस दवा पर आगे काम करने का विचार किया और आगे के परीक्षण में वैज्ञानिको ने इसे पुरुषो के सेक्ससुअल लाइफ के लिए अत्यधिक प्रभावी उपाय पाया। पुरुषों में पहले से ही इंजेक्शन और कृत्रिम इम्प्लेंट्स इस्तेमाल होते थे, लेकिन इस नई दवा को आसानी से गोली के रूप में लिया जा सकता था। शुरुवात में इस यूके-92480 के नाम से जाना जाता था, बाद में इसका नाम बदलकर वियाग्रा रखा गया , और जब यह पहली बार 1998 में बिक्री के लिए बाजार में लाया गया तो अभी तक की सबसे तेजी से बिकने वाली दवा बन गई।

प्लास्टिक 

बेल्जियम केमिस्ट लियो बेकलैंड एक बेहतर प्रकार का टार बनाने की कोशिश में लगे हुए थे , जो की चिपकाने और कोटिंग्स में इस्तेमाल होता था लेकिन उनका प्रयोग प्लास्टिक के आविष्कार साथ ख़तम हुआ । उनका बनाया गया मिश्रण एक विशाल कुकर में गर्म करने पर बेहतरीन टार बनने में असफल रहा, लेकिन बेकलैंड ने इस लचीले पदार्थों में व्यापक क्षमता देखी। उन्होंने अपने इस उत्पाद को बेक्लाइट नाम दिया , और 20 वीं शताब्दी तक यहाँ हमारे आस पास की हर छोटी बड़ी चीज़ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

माइक्रोवेब 

source

अमेरिकी भौतिक विज्ञानी पर्सी स्पेंसर 1940 के दशक में रडार का उपयोग करने वाली एक अग्रणी विशेषज्ञ थे , जो द्वितीय विश्व युद्ध जीतने के लिएघुसपैठियों के प्रयासों को असफल करने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करते थे। क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर कि एक रिपोर्ट के अनुसार कि एक दिन रडार डिवाइस के साथ प्रयोग करते समय, उनकी पॉकेट में रखी चॉकलेट बार को पिघलते देख वो आश्चर्यचकित रह गए । 1947 तक उन्होंने अपने एक कर्मचारी , रेथियॉन के साथ पहला माइक्रोवेव बनाया, एक विशाल मइक्रोवेव मशीन, जो की ऊपर दी हुई पिक्चर में दिख रही है।

सिंथेटिक डाई 

विलियम हेनरी पेर्किन सिर्फ 18 साल के थे जब उन्होंने दुनिया की पहली सिंथेटिक डाई का आविष्कार किया असल में वह  मेडिसिन क्विनिन बनाने की कोशिश कर रहा थे। लेकिन पेर्किन ने देखा कि उन्होंने जो भूरे रंग का कीचड़ जैसा दिखने वाला पदार्थ बनाया था , बीकर से साफ करने के बाद बीकर का रंग बैंगनी रंग में बदल गया। बाद में उन्होंने रेशम पर इस मिश्रण का परीक्षण किया, और कपडे का रंग बदलने से हेनरी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे बेचने का फैसला किया।

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