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भारत की 12 विचित्र ट्रेडिशन जिन्हे जानने के बाद आप भी कहेंगे OMG ये है मेरा इंडिया।

भारत दुनिया के लिए एक अलग ही आकर्षण वाली जहा मनोरजनं की कोई कमी नहीं है। गांवों से लेकर शहरों तक, हमारा देश संस्कृति से  समृद्ध है और जिसकी गहरी जड़े हैं। कलरफुल फेस्टिवल और जीवंत उत्सवों के बीच, भारत में कुछ प्रथाएं ऐसी भी हैं जो असाधारण रूप से अजीब हैं लेकिंन लोगो की इनमे आसीम श्रद्धा हैं। भारत की ऐसी ही 15 विचित्र ट्रेडिशन जिन्हे जानने एक बाद आप भी कहेंगे। OMG ये है मेरा इंडिया।

शादी से पहले शादी

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असल शादी करने से पहले किसी चीज़(पेड़) या जानवरो से शादी करवाना आज भी हमारे देश में कई समस्या का समाधान माना जाता है। देश के कई दूरस्थ गांव में माना जाता है कि यदि एक लड़की किसी चेहरे सम्बन्धी विकृति के साथ पैदा होती है तो उस पर भूत का साया होता है जो कि उसके जीवन साथी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।इसलिए इस समस्या को दूर करने और लड़की से किसी भूत या राक्षस से दूर करने के लिए पहले उसकी शादी एक जानवर से कराई जाती है। एक बार ऐसा करने के बाद, वह किसी भी वर के लिए स्वतंत्र हो जाती है।

सर बचाके

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अच्छे स्वास्थ्य और सफलता के लिए आप क्या करेंगे? क्या आप एक पुजारी को अपने सिर पर नारियल तोड़ने देंगे? शायद ऩही! लेकिन आश्चर्यजनक रूप से तमिलनाडु के एक गांव में, ऐसा माना जाता है कि किसी के सिर पर नारियल तोड़ने से देवता प्रसन्न होंगे और समृद्धि और गाँव के लोगो के स्वास्थ और कल्याण के लिए अच्छा होगा। मेडिकल चिकित्सकों की चेतावनियों के बावजूद, इस परंपरा का पालन स्थानीय लोगों द्वारा बहुत अधिक निष्ठा के साथ किया जाता है।

काया क्लेश

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कई मामलो में धार्मिक अभ्यास अक्सर दर्दनाक होते हैं। जैन धर्म, एक लोकप्रिय और व्यापक रूप से पालन किया जाने वाला प्राचीन भारतीय धर्म है जो सांसारिक सुख से छुटकारा पाने और सामान्य जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करता है। जैन धर्म के कट्टर समर्थको में एक दर्दनाक परंपरा का अभ्यास किया जाता है जहां उन्हें पूरी तरह से गंजे होने तक अपने एक बालो को हांथ से तोड़ना पड़ते है उसके बाद घावों को गाय के गोबर से बने एक विशेष लेप से ठीक किया जाता है।

देवता को खुश करने के लिए मेढको की शादी

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आपने भारत में पेड़ों से शादी करने वाले लोगों के बारे में तो जरुर सुना होगा लेकिन कभी भी मेढको की शादी के बारे में नहीं सुना होगा? जाहिर है, वरुण देव, जो बारिश के देवता है पर असम के जोरहाट जिले के लोगों का बहुत विश्वास है, और ऐसा माना जाता है कि यदि जंगली मेढको की शादी पारंपरिक हिंदू रिवाज से की जाती है , तो यह लंबे समय से चले आ रहे सूखे की समस्या को खत्म कर देगा और कुछ समय  के भीतर ही भारी बारिश होगी । यह महत्वपूर्ण है कि शादी एक पुजारी की उपस्थिति में सभी हिंदू रीति रिवाज और  परंपराओं के साथ किये जाए।

“गरुउडन थूकम”

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लोग अपने पूजनीय देवी देवताओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं और कभी-कभी ये बहुत ज्यादा ही दर्दनाक होते है। ऐसी एक परंपरा केरेला के काली मंदिरों में “गरुउडन थूकम” है। ऐसा माना जाता है कि गरुड़ (एक ईगल) अपनी खून की प्यास बुझाने के लिए काली को लाया गया था।। पौराणिक कथाओं को रिप्रेजेंट करने के लिए लोग यहाँ एक अनुष्ठान नृत्य करते हैं जिसमे वे अपनी पीठ को हुक की मदद से लटकाते हैं और काली को खुश करने के लिए खुद को ईगल की तरह हवा में लटकाते हैं जो किसी को भी विचलित कर सकता है।

मेड मेड स्नाना

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देश में जातिवाद सिस्टम राजनैतिक तौर पर नहीं बल्कि आम लोगो के जीवन पर कितना हावी है इसका एक सबूत ये प्रथा है। इसे मेड मेड स्नाना के नाम से जाना जाता है । यह कर्नाटक के कुछ मंदिरों में किया जाता है। इसमें निचली जातियों के लोग ऊपरी जाति के लोगों का बचा हुआ भोजन फर्श पर रोल करते हुए खाते हैं। इसकी कड़ी आलोचना होने के बावजूद भी ये प्रथा अभी भी सक्रिय है और सैकड़ों भक्तों को आकर्षित करती है।

गरबाडा एकादशी

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गारबाडा गुजरात का एक शहर है यहाँ जो गायों को लोगो के ऊपर से गुजारने या यू कहे की लोगो को गायो के नीचे रोंदने की परंपरा है। यह दर्दनाक हो सकता है, लेकिंग गायों को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि उनका ऊपर से गुजरना आपकी समस्याओं को कम करेगा अगर आपकी पीठ में इससे कोई चोट नहीं पहुंची तो ये आपके लिए काम नहीं करेगा।

बच्चे के बेहतरीन स्वास्थ के लिए

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बच्चो को हंसाने के लिए हवा में फेकना तो आम बात है , लेकिन यदि उसे 50 फीट की ऊंचाई से फेका जाए तो।  बस इसका विचार आपके दिमाग में कई सारी तस्वीरें बना देगा। हालांकि, भारत के विभिन्न हिस्सों में, ऐसा माना जाता है कि बाबा उमर दरगाह और श्री संतेश्वर मंदिर की छत से बच्चे को जमीन पर छोड़ने से(नीचे पुरुषो की टोली एक चादर के साथ बच्चे के पकड़ने के लिए खड़ी रहती है ) बच्चे को स्वास्थ्य, समृद्धि मिलती है । इस परंपरा की कड़ी आलोचना की गई है लेकिन अभी तक ये ट्रेडिशन जारी है।

थेय्यम

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क्या आप विश्वास करेंगे कि भगवान मनुष्य के शरीर को धारण कर सकता है ? आप शायद न करे और वैज्ञानिक रूप से भी शायद ऐसा संभव न हो। लेकिन आध्यात्मिक रूप से संभव है और ऐसा हम नहीं मानते है बल्कि ऐसा मानना है केरेला के उन लोगो का जो मिथकों और किंवदंतियों का हवाला देते हुए भारी ड्रम की ध्वनि पर नृत्य करते है जिसमे वो भारी मेकअप और डेकोरेटेड ड्रेस भी हुए होते है। जैसे-जैसे उत्सव आगे बढ़ता है, नर्तक दिव्य शक्तियों से सम्पूर्ण माना जाता है फिर वो भक्तों को आशीर्वाद देता है, आग पर चलता है और आश्चर्यजनक कार्य करता है।

बन्नी फेस्टिवल

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हर साल, दशहरा के दौरान आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले का देवरागट्टू मंदिर लंबे समय से लाठी से हजारो पुरुषो को एक-दूसरे के सिर पर पुरे जोर से लाठी मारने का गवाह बनता आ रहा है । त्योहार आधी रात को शुरू होता है और सुबह तक जारी रहता है, यह भगवान माला-मल्लेश्वर का सम्मान करने के लिए किया जाता है जिसमे हर साल सेकड़ो लोग बुरी तरह जख्मी होते है।

ऊँटो के लिए ब्यूटी कॉन्टेस्ट

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ये फेस्टिवल नवंबर के महीने में राजस्थान के पुष्कर शहर में मनाया जाता है जो 5 दिनों तक रहता है। इन 5 दिनों के दौरान, 50,000 से अधिक ऊंटो को परेड के लिए तैयार क्या जाता है जो ब्यूटी और रेसिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेते है।

पुलि-काली उत्सव

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यह त्यौहार हर साल केरल के त्रिशूर जिले में मनाया जाता है जहां प्रशिक्षित कलाकार, बाघों के रूप धारण करते है और पारंपरिक लोक गीतों पर प्रदर्शन करते हैं। यद्यपि सड़कों पर नृत्य करते कलाकारों का देखना काफी रोमांचित करता है , फिर भी परंपरा कुछ हद तक विचित्र है।

 

“लोगो का इस तरीके से ट्रेडिशन फॉलो करते आना जिनमे उन्हें कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है लम्बे समय से चली आ रही है जिनमे से कुछ पूरी तरह से नियम और शायद प्रकर्ति के खिलाफ है फिर भी लोग इसका हिस्सा बनना पसंद करते है। आपकी इस पर क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताये ।”

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