सेलेब्रेटी

“थैंक्यू गौतम गंभीर” 125 करोड़ के देश के वर्ल्ड कप के सपने को सच करने के लिए वो भी दो बार

टीम इंडिया के ताबड़तोड़ बल्लेबाज गौतम गंभीर ने मंगलवार को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से सन्यास लेने की घोषणा कर दी । 2004/05 सत्र से अपने क्रिकेट करियर की शुरुवात करने वाले गौतम गंभीर ने ,58 टेस्ट, 147 ओडीआई और 37 टी -20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने आईपीएल के सभी 11 सत्रों में भी खेला, जिससे कोलकाता नाइट राइडर्स ने दो आईपीएल खिताब (2012 और 2014) जीते।

अपने करियर में, वह भारतीय पक्ष का एक अहम हिस्सा थे जो 2007 में विश्व कप टी 20 और 2011 में विश्व कप में जीत बहुत बड़ा कारण बने।

गंभीर एक मुख्य वजह है कि भारत ने दो विश्व कप जीते हैं और जिसकी वजह से संभवतः धोनी को भारत का सबसे सफल कप्तान माना जाता है। हालाँकि धोनी का योगदान अतुलनीय था लेकिन फिर भी गौतम गंभीर के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

कल्पना कीजिए कि अगर भारत ने 2007 टी 20 विश्वकप (फाइनल बनाम पाकिस्तान), और 2011 विश्व कप (फाइनल बनाम श्रीलंका) के आखिरी मैच नहीं जीते होते , तो क्या धोनी को अभी भी भारत के सबसे सफल कप्तान माने जाते? शायद नहीं।

यह धोनी के कैप्टेनसी स्पिरिट पर सवाल नहीं है वे बेहतर है और कई तरह से बेस्ट है लेकिन गंभीर को उतना क्रेडिट न मिलना आज भी निराशाजनक है।

  1. आईसीसी विश्व ट्वेंटी 20 फाइनल – भारत बनाम पाकिस्तान

इस मैच में पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया ने कुल 157 रन बनाए वही गंभीर ने अकेले  75 (टीम स्कोर के लगभग आधे) रन बनाए, जिसमें पाकिस्तान 5 रन से हार गया। अगर गंभीर ने उस समय अपने खेल का अद्भुत प्रदर्शन नहीं किया होता, तो संभवतः हम विश्व ट्वेंटी -20 वर्ल्ड कप चैंपियंस नहीं होते।

      2. .आईसीसी विश्व कप 2011

वर्ल्ड कप 2011 के मैच में जहां सचिन और सहवाग जैसे बल्लेबाज बिना कोई स्कोर किये आउट हो गए और दर्शको ने वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद छोड़ दी थी तभी, गंभीर ने मोर्चा सँभालते हुए टीम इंडिया पर बढ़ते दवाब को स्थिर कर दिया, क्योकि दो बड़े विकेट लगातर गिरने के बाद टीम इंडिया पर प्रेसर बढ़ता जा रहा था।

उस मैच में गंभीर भारत के लिए सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज थे पर दुर्भाग्यवश वो शतक बना पाने में असफल रहे और शायद शतक बनानेका ख्याल उनके दिमाग में था भी नहीं , हालांकि, उन्होंने अपने देश को वह काम करके दिया जो करने के लिए उन्हें सौंपा गया था।

उन्होंने धोनी को काउंटर अटैकिंग के साथ शानदार 91 रन बनाने के लिए प्लेटफार्म प्रदान किया जिन्होंने विनिंग सिक्सर मरते हुए क्रिकेट के इतिहास में इंडिया का कद और बड़ा दिया।

क्रिकेट मैदान के बहार भी वो अपने कामों के साथ उतने ही एक्टिव है वो सामाजिक मुद्दे पर अपने विचार रखते है और साथ ही कई चैरिटीबल ट्रस्ट भी चलाते है। पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात एक सिपाही के शहीद होने के बाद गंभीर ने उस सिपाही की लड़की की पूरी पढ़ाई लिखाई और परवरिश की जिम्मेदारी ले ली।

इसलिए उन्हें इंडियन क्रिकेट टीम का “अनसंग हीरो”(क्रेडिट न लेने वाला) कहा जाता है।

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Neelesh

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