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अंतरिक्ष में जाकर वापस लौटने वाले स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से जुड़े 10 महत्वपूर्ण तथ्य

मंगलवार को स्पेसएक्स ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल वायु सेना स्टेशन से अपने इस्तेमाल किए गए ब्लॉक-5 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, और आधे घंटे बाद स्पेस ऑर्बिट में इंडोनेशियाई उपग्रह मेरह पुतिह को तैनात कर दिया। 

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स्पेस एक्स का ये राकेट दुनिया का पहला ऐसा रॉकेट है जिसने अंतरिक्ष में जाने के बाद धरती पर सेफ लैंडिंग की। स्पेस एक्स ऐसे ही रॉकेटों पर काम कर रही है जिन्हे अंतरिक्ष में कई बार भेजा और धरती पर लैंड कराया जा सके ताकि हर बार नए राकेट बनाने की जगह पुराने राकेट का इस्तेमाल फिर से किया जा सके।

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स्पेस एक्स इससे पहले भी इस राकेट के सफलतापूर्वक परिक्षण कर चुकी है। जानते है फाल्कन-9 से जुड़े 10 ऐसे तथ्य जो भविष्य में अंतरिक्ष उड़ान के हमारे तरीको और नजरिये को पूरी तरह बदल देगा।


 

1. ये ब्लॉक-5 रॉकेट या फाल्कन-9 अपने पहले चरण में ही कंपनी के ड्रोन शिप “ऑफकोर्स आई स्टिल लव” पर सफलतापूर्वक लैंड कराया गया जो की अटलांटिक में केप कैनावेरल से कुछ सौ मील की दूरी पर खड़ा था।

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2. अपनी सफल लैंडिंग के साथ, फाल्कन-9 अंतरिक्ष में तीसरी बार जाने वाला राकेट बनेगा।


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3. यह पहली बार था जब स्पेसएक्स ने अपने नए शक्तिशाली ब्लॉक-5 बूस्टर(रॉकेट वाहक)में से एक का दोबारा उपयोग किया – फाल्कन 9 की अंतिम टेस्टिंग का आखिरी लक्ष्य  100 बार स्पेस में जाने और वापस आने का है।


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4. फ्लोरिडा से बांग्लादेश के लिए एक बड़े संचार उपग्रह को भेजने के लिए स्पेसएक्स ने मई में फाल्कन-9 का इस्तेमाल किया था। राकेट के अपनी उड़ान के पूरा होने और वापस धरती पर स्पेस एक्स के ड्रोन जहाजों में से एक पर लैंड करने के बाद  स्पेसएक्स ने, रॉकेट का इंस्पेक्शन किया और तीन महीने के भीतर उसे दोबारा स्पेस में उड़ान भरने के लिए तैयार कर दिया।


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5. स्पेसएक्स के संस्थापक और सीईओ एलोन मस्क बताते है कि ब्लॉक-5 के पहले चरण में राकेट को बिना किसी बदलाब और इंपेक्शन के  10 बार इस्तेमाल किये जा सकने वाला बनाना हमारा लक्ष्य है और थोड़े बहुत बदलाब और इंपेक्शन के साथ इस ब्लॉक-5 बूस्टर को  100 मिशनों में सक्षम होने लायक बनाने की कोशिश हम कर रहे है।


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6. मस्क का कहना है कि अंतरिक्ष यातायात की लागत को कम करने के स्पेसएक्स के ऐसे लॉन्ग टर्म मिशन के लिए पुन: उपयोग में लाए जाना राकेट बनाने पर काम कर रही है ताकि 2030 तक इंसान की मंगल गृह पर भेजा जा सके।


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7. अभी स्पेस एक्स का लक्ष्य एक फाल्कन-9 रॉकेट को 24 घंटे के भीतर दोबारा तैयार करके स्पेस में भेजना है।


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8. आज का लॉन्च 16 दिनों में स्पेस एक्स का तीसरा और साल का 15 वां लॉन्च था।


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9.   2020 तक, मस्क ने मंगल ग्रह पर खोज के लिए फाल्कन-9 से भी बड़ा राकेट, बिग फाल्कन रॉकेट (बीएफआर)  रॉकेट बनाने की योजना बनाई है।


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10. ये स्पेस एक्स का अभी तक का  28वा बूस्टर था जिसने स्पेस में जाने के बाद धरती पर लैंडिंग की।



 

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Neelesh

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