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₹100 का नया नोट क्यों है 100 करोड़ का नया बोझ और ATM कंपनियों के लिए सिरदर्द

2000 ,500 , 200 ,50  और 10 रुपए का नोट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक( आरबीआई )ने ₹100 के नए नोट लाने की घोषणा की है लेकिन ₹100 का यह नया नोट 100 करोड़ का नया खर्चा साथ में लेकर आया है और ATM  बनाने वाली कंपनियों के लिए सिरदर्द बन गया है।

100 rupee note ke naye note features - Hindi Wiki

विमुद्रीकरण के बाद अभी तक रिलीज़ होने वाले सभी नोट पिछले नोटों की आकार की अपेक्षा छोटे हैं ₹100 का नया नोट भी पिछले नोट के आकार के मुकाबले छोटा है आरबीआई की घोषणा के अनुसार,

पुराने ₹100 की लम्बाई  157 मिलीमीटर है और चौड़ाई  73 मिलीमीटर है जबकि नया नोट 142 मिलीमीटर लंबा और 66 मिलीमीटर चौड़ा है।

₹100 के नोट के साथ चुनौतियां 

 

  • ₹100 के नए नोट के लिए अब देश के सभी 2,37,000 एटीएम को दोबार री-कैलिब्रेट (नये सिरे से दुरुस्त) करना होगा। 

 

  • ATM को दोबारा री-कैलिब्रेट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी जिसमें  काफी समय लगेगा और लागत खर्च भी बढ़ेगा। 

 

  • ₹100  के नए नोट के लिए सभी एटीएम को ठीक करने के लिए ATM निर्माता कंपनी के अतिरिक्त इंजीनियर की जरूरत होगी साथ ही संबंधित बैंक के नगदी  मामलों की देख-रेख के लिए अधिकारियों की जरूरत होगी।

 

  • एक ATM को दुरुस्त करने में 20 मिनट का समय लगता है।

 

  • इसमें लॉजिस्टिक का काम भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जिसमे नगरीय  एजेंसी के अधिकारी और ATM  कंपनी के इंजीनियरों का साथ होना।

 

  • 1 दिन में केवल 15 से 20 ATM को ही री-कैलिब्रेट किया जा सकता है यानि हर एक ATM को रेकेलिब्रेट करने में बहुत ज्यादा पैसा और  समय भी खर्च हो जाएगा।

 

  • इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक अरब रुपए का खर्च का अनुमान है और साथ ही साथ एक साल या उससे ज्यादा का समय भी लग सकता है।

 

₹100 के नोट के पीछे छपी ‘रानी की वाव’ से जुड़े 10 तथ्य

1. ‘रानी की वाव’  गुजरात में पाटन शहर में स्थित एक जटिल रूप से निर्मित बाबड़ी है।

2. रानी की वाव 11वीं शताब्दी के राजा भीमा के स्मारक के रूप में बनाया गया था।

3. यह अपने प्रकार की सबसे बड़ी और सबसे भव्य संरचनाओं में से एक है।

4. बाबड़ी सरस्वती नदी के तट पर स्थित है।

5. ‘रानी की वाव’ को यूनेस्को द्वारा  22 जून 2014 को विश्व धरोहर घोषित  किया गया था।

Rani ki Vav - Naye 100 Rupee Note Feature 2018

6. रानी की वाव जटिल ‘उलू-गुर्जरा वास्तुकला‘ शैली में बनाया गया एक उलटा मंदिर है जिसे सीढ़ियों के सात स्तरों के साथ बनाया गया था और 500 से अधिक प्रमुख मूर्तियां राखी गई है।

7. रानी की वाव ने अक्टूबर 2016 में नई दिल्ली में भारतीय स्वच्छता सम्मेलन (इंडोसैन) “स्वच्छतम आइकॉनिक प्लेस” का खिताब जीत चूका है।

8. इसमें बना शानदार स्टेप वेल (कदम कुआँ) लगभग 64 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 27 मीटर गहरा है।

9. कुए के सबसे आखिर वाले स्टेप के नीचे एक 30 किलोमीटर लम्बी सुरंग भी है जो कि  पत्थरो और गीली मिट्टी से बंद कर दिया गया है। ये सुरंग का रास्ता पाटन शहर के नजदीक स्थित सिद्धपुर नगर की ओर जाता है। इस सुरँग को बनाने वाले ने युद्ध के  दौरान राजा के भागने  लिए बनाया गया था।

10.नाम के अनुरूप, रानी-की-वाव को भारत के स्टेप वेल (कदम कुआँ) के बीच रानी माना जाता है।

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